Monday, May 18, 2009

कांग्रेस के jeetne की वजह विकल्पहीनता तो नही.

१५ win लोकसभा के परिणाम आनेके बाद sare chunavi visheleshak अपने-अपने vishleshan में jute हैं की इस hairatangez janadesh के mayane matlab क्या हैं ? भारत की janta ने एक bar फ़िर सब को ग़लत ghoshit कर दिया है.exit pole के परिणामो से बिल्कुल अलग ये results क्या कह रहे हैं , wakei ये एक rahasay है। जो भी लोकतंत्र को samajhane के dave करते हैं उनके लिए ये एक नई पहेली है , yakinan ये nachiz भी esi दौड़ में shamil है. जो कोई dawa to नही pesh कर रही पर en nami-girami hastiyon की लम्बी chaudi thysis से अलग कुछ behad sidhi-sadhi baatein उठाना chahti है.कल से tamam logno के comments padkar ye jana की vaishvik punji के ghunghat में छिपा लोकतंत्र sivay सच के baki सब कुछ kahne और करने के लिए बिल्कुल independent है।


Banagi के तौर पर namcheen logno के विचार mauzood हैं , economic times के editorial में पड़ा की swami जी कैसे इस जीत को Mahamandi के is दौर में Bhartiya Kisano की samridhi से jod कर देख रहे हैं। मशहूर yashvant deshmukh का kahna है की bhajpa का negative prachar ही उसके लिए taaboot की keel sabit हुआ । बीबीसी के संजीव जी का kahna है की janta ने भ्रष्ट logno को छोड़कर honest logno को chune है।


पर mai ये समझ नही pa रही हूँ की ये vahi पार्टी है जिस के ऊपर vansvad की rajneeti और भ्रष्टाचार की neeti अपनाने की muhar लगी हुई है। फ़िर हमk हदे कांग्रेस अन्य सभी विकल्पों के मुकाबले सबसे है और शायद कांग्रेस ।


की जीत की सबसे बड़ी वजह ये विकल्पहीनता ही है mahima और दक्षिण morche की जीत बता रहे हैं वो गलती पर हैं , ये janadesh ishara कर रहा है की देश में हर कोई aarthok sithirta चाहता है और mandi की zabardast मर से trasr इंडिया इससे bahar आना चाहता है । janta etni समझदार है की वो ये समझ रही है की mandi सिर्फ़ हमारे देश की दिक्कत नही है ये pure vishv में है और उसने ये भी देखा है की congress सरकार ने इससे bahar आने की , इसे jhuthlane की पुरी कोशिश की है । Congress अपनी नीतियों में saaf है वो आम आदमी के mukhaute में अपनी नीतियों को chhipane और bahkane में पुरी तरह safal रही है। Congress के pas neta हैं जो en नीतियों के लिए janta के आगे jimmedari ले सकते हैं । kahne के matlab ये है की mauzooda halat में jahan हम hade हैं वहां से Congress anya sabhi vikalpon ke mukable sabse मज़बूत hai। Aur shayad Congres ki jeet ki sabse badi vajah ye vikalpheenta hi hai.




2 comments:

  1. सबसे पहले तो आप हिंदी में लिखें, वरना इतना कष्ट उठाकर कोई आपके बेहतरीन लेख को भी नहीं पड़ना चाहेगा. इसके लिए हिन्दयुग्म.कॉम में टाइप करें फिर कॉपी-पेस्ट...
    रही इस जनादेश के मायने निकालने की बात तो यशवंत देशमुख से शुरू करते हैं. आपको शायद याद होगा हमारी क्लास में उन्होंने बाकी सभी चीजों से इतर उत्तरी मुंबई के भाजपा के उम्मीदवार राम-नाइक के जीतने के जो दावे और तर्क पेश किये थे वो सब ग़लत साबित हुए. उन्होंने बहुत जोर देकर राम-नाइक के काम, पिछला चुनाव हारने(गोविंदा-कांग्रेस) के कारणों बारे में बताते हुए कहा था कि पूरे भारत में भाजपा की सिर्फ यही एक सीट कन्फर्म है जिस पर दांव भी खेला जा सकता है.
    और आनंद प्रधान कहते हैं "... खुद कांग्रेस को यह उम्मीद नहीं थी कि उसे दो सौ के आसपास और यूपीए को दो सौ साथ के करीब सीटें मिल जायेंगी. इसीलिए चुनावों के दौरान और मतगणना से पहले सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ और सौदेबाजी की चर्चाएं खूब जोर-शोर से चलती रहीं.
    लेकिन ऐसा लगता है कि मतदाताओं को यह सब पसंद नहीं आया. मतदाताओं ने साफ़ तौर पर सौदेबाजी और जोड़-तोड़ की राजनीति को नकार दिया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि यह छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों सत्ता के भूखे नेताओं के अवसरवाद और निजी स्वार्थों की 'सिनिकल' राजनीति के खिलाफ जनादेश है..."
    हमें मानना होगा कि हमारे देश की ज़्यादातर आबादी आज भी गावों में है. शहरों में जो आबादी है उसमें कुछ गावों से ही रोज़गार की तलाश में आये हुए हैं. जिसमें ज़्यादातर का वोट आज भी गावों में है और वो महज वोट देने की खातिर गावों में नहीं जाते हैं. बाकी शहरियों में भी उस तरह से वोट डालने का उत्साह नहीं दिखाई पड़ता जो गावों में देखने को मिलता है. तो यह साफ़ है कि असली वोटर कौन है. लेकिन क्या एक आदमी को दूसरे आदमी के, एक गांव वालों को दूसरे गांव वालों के, एक राज्य को दूसरे राज्य के रूझान के बारे में सही-सही पता रहता है, जब पूरा समाचार-तंत्र(प्रिंट,टीवी सभी कुछ) एक विज्ञापन एजेंसी की तरह काम कर रहा हो? और अधिकांश मामलों में कोई मतदाता दूसरे को देखकर फैसला नहीं लेता.
    तो जनता के इस संयोग भरे सामूहिक फैसले पर कि सभी ने कांग्रेस को वोट देना है थोडा हैरानी है. हाँ, यह विकल्पहीनता को दिया गया मत ज़रूर है, जिसे प्रधान सर भी मानते हैं.
    वाम मोर्चे की हार के बारे में उन्होंने लिखा है," पश्चिम बंगाल में माकपा को नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों को हिंसक तरीके से लागू करने की राजनितिक कीमत चुकानी पड़ी है." आगे लिखा है, "निश्चय ही वाम मोर्चे को पहले यूपीए सरकार का समर्थन करने और उसके बाद हताशा में एक सिद्धांतहीन, अवसरवादी और साख खोये नेताओं का तीसरा मोर्चा बनाने की राजनीतिक कीमत चुकानी पडी है."
    क्या सिंगूर,नंदीग्राम का असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक ही सिमट कर रह गया था या देश भर के मतदाताओं ने इसके खिलाफ मत दिया? बाकी सब चीजों के अलावा क्या वाम मोर्चे की हार में मीडिया का भी कोई रोल बनता है, जिसने पूरे कार्यकाल के दौरान लेफ्ट को सरकारी, विकास की नीतियों में टांग अड़ाते एक उद्दंड लड़के की तरह पेश किया!

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  2. Thanks Bharat.Mai khud kai shabdon ke Hindi mein na aane se pareshan Hoon.Shayad tum ne jo method Bataya Hai U se Kuchh Help Milegi.

    Aur Batao Internship Badiya chal rahi Hai Ya Kutta Banne Ki Taiyari ho rahi Hai.(Mujhe Neha ne tumhare reply ke bare mein bataya tha.Isliye Puchh rahi Hoon? Mere pas tumhari mail ID nahi hai? Ek invitation bhej dena.Mai add kar Loongi.

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